मंत्र, मन और चेतना — एक नई लेख श्रृंखला की शुरुआत

मन्त्रों को बिना मन और चेतना के स्तर पर समझे यदि उनका प्रयोग या उच्चारण किया जाए तो मन्त्रों का वांछित लाभ नही लिया जा सकता इसलिए हमने “मंत्र, मन और चेतना – एक नई लेख-श्रृंखला की शुरुआत” की है.

हम सब अपने जीवन में कुछ न कुछ बेहतर चाहते हैं — शांति, स्पष्टता, आत्मविश्वास, या बस मन की थकान से मुक्ति।
लेकिन अक्सर हम बाहर की परिस्थितियों को बदलने में लगे रहते हैं, जबकि असली परिवर्तन भीतर से शुरू होता है।
यहीं से शुरू होती है —
मंत्र, मन और चेतना की यात्रा।

हमारी सनातन संस्कृति में मंत्रों का स्थान सर्वोच्च और बहुत महत्वपूर्ण है। इस श्रंखला में आपको मंत्र विज्ञान सम्बन्धी सभी जानकारी मिलेगी जो आपकी आध्यत्मिक यात्रा में आपको लाभान्वित करेगी.

इस श्रृंखला में हम समझेंगे कि मंत्र क्या है, मन कैसे काम करता है, और चेतना से इसका गहरा संबंध कैसे बनता है।

मंत्र क्या हैं, wekipedia पर भी पढ़ सकते हैं

हमारे आसपास मंत्रों को लेकर दो तरह की धारणाएँ हैं—
कुछ लोग इन्हें केवल अंधविश्वास मानते हैं, तो कुछ लोग बिना प्रश्न किए इन्हें श्रद्धा से दोहराते रहते हैं।
कुछ के मन में कभी यह विचार आता ही नहीं कि आखि़र ये मंत्र क्या हैं और इनका उच्चारण क्यों किया जाता है।

क्या मंत्र केवल पूजा-पाठ तक सीमित हैं?
या वे मन, चेतना और जीवन को समझने का एक सूक्ष्म माध्यम भी हो सकते हैं?
इन्हीं प्रश्नों की खोज में
Be Shining पर हम यह नई लेख-श्रृंखला शुरू कर रहे हैं—

मंत्र, मन और चेतना

“मंत्र, मन और चेतना” श्रृंखला खुद को समझने की यात्रा है.

यह श्रृंखला—
• किसी धर्म का प्रचार नहीं करेगी
• किसी मान्यता को थोपेगी नहीं
• और न ही चमत्कारों का दावा करेगी
यहाँ हम मंत्रों को
वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक—तीनों दृष्टियों से समझने का प्रयास करेंगे।

इस श्रृंखला में क्या-क्या होगा?

इस यात्रा में हम क्रमशः जानने की कोशिश करेंगे—

  1. मंत्र: अंधविश्वास या मन का विज्ञान?
  2. मंत्र जपते समय मन के भीतर वास्तव में क्या घटित होता है
  3. ध्वनि, कंपन और चेतना का आपसी संबंध
  4. क्या बिना आस्था के भी मंत्र प्रभाव डाल सकते हैं?
  5. मंत्र, ध्यान और आत्म-अनुभव के बीच का सेतु
  6. और अंत में—क्या मंत्र हमें स्वयं से मिला सकते हैं?

हर लेख  प्राथमिक जिज्ञासा से शुरू होगा
और धीरे-धीरे आपको गहराई की ओर ले जाएगा।

यह श्रृंखला किसके लिए है?

यह उन पाठकों के लिए है—

  • जो प्रश्न पूछना चाहते हैं
  • जो अंधअनुकरण नहीं, समझ चाहते हैं
  • जो जीवन में केवल कर्म नहीं, अर्थ ढूँढ रहे हैं

यदि आप भी सीखते-समझते आगे बढ़ना चाहते हैं,
तो यह श्रृंखला आपके लिए है।

एक विनम्र निवेदन

इस श्रृंखला को पढ़ते समय
अपनी मान्यताओं को थोड़ी देर के लिए साइड में रखें
और केवल अनुभव करने की दृष्टि से पढ़ें।

शायद किसी लेख में आपको उत्तर मिल जाए,
और शायद किसी लेख से नया प्रश्न जन्म ले।


🌿श्रृंखला के सभी लेख

1. मंत्र: अंधविश्वास या मन का विज्ञान?

2. मन क्या है?

3. चेतना क्या है?


यदि यह विषय आपको छूता है,
तो अगला लेख पढ़ने के लिए स्वयं को थोड़ा समय दें।
यह श्रृंखला धैर्य से पढ़े जाने के लिए है।

इस श्रृंखला को पूरा पढ़ने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें…

2 thoughts on “मंत्र, मन और चेतना — एक नई लेख श्रृंखला की शुरुआत”

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